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'गोस्वामी तुलसीदास'
- डॉ0 कृष्ण गोपाल कपूर (अनुसंधान सहायक)
सूचना एवं भाषा प्रौद्योगिकी विभाग
गोस्वामी तुलसीदास सगुण भक्ति काव्य धारा के रामभक्ति शाखा के प्रमुखतम कवि माने जाते हैं। आपने 'रामचरित मानस' जैसे विश्व विख्यात महाकाव्य की सर्जना कर हिन्दी भाषा को विश्व में प्रसिद्धी दिलाने का श्रेयकर कार्य किया। गोस्वामी तुलसीदास ने 'राम' के आदर्श चरित्र द्वारा मनुष्यों को नैतिक मूल्यों की प्रेरणा लेने का प्रमुखतम कार्य किया। आपके काव्य में शील, सौन्दर्य और शक्ति का अद्भुत समन्वय मिलता है। वहीं भक्ति, ज्ञान और कर्म की त्रिवेणी भी प्रवाहित होते हुए दिखाई देती है। गोस्वामी का समग्र काव्य लोक मंगल की मंगलकारी कामनाओं से ओतप्रोत है। इसमें समन्वय की विराट चेष्टा गोस्वामी तुलसीदास जी का धयेय रहा है।
तुलसीदास के जन्म के विषय में यह प्रचलित है-कि वे श्रावण शुक्ला सप्तमी को इस धरा पर सम्वत 1554 में अवतीर्ण हुए।
पन्द्रह सौ चौवन विसे, कालिन्दी के तीर।
श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी धर्यो शरीर।।
तुलसीदास ने जन्मकाल से विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, अनाथ हो कर 'नर परिदास' जैसे गुरू के सानिध्य में उन्होंने वेद, पुराण और अन्यान्न शास्त्रों का गहन अध्यन किया।
तुलसीदास के प्रादुर्यभाव के समय देश में विपरीत परिस्थितयाँ व्याप्त थी। ऐसे विषमता द्वेष और वैमनस्यता भरे वातावरण में समाज में ध्रम, दर्शन, समाज के राजनैतिक वातावरण में टकराव था। घोर निराशा में आस्था की लो रचनाकार ही जला सकता था, जिसे जलाकर गोस्वामी तुलसीदास ने रचनाकार के दायित्व का निर्वाह कर जन समुदाय में आशा, आस्था और विश्वास का वातावरण स्थापित किया।
शेवों एवं वैष्णवों, सगुण और निर्गुण, भक्ति और ज्ञान, राजा और प्रजा, द्वैत और अद्वैत दार्शनिक और सामाजिक आदि विविध क्षेत्रों में समन्वय स्थापित कर रामराज्य की अवधारणा को समाज के सामने आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया।
तुलसीदास ने 'रामचरित मानस' के अतिरिक्त अनेकों श्रेष्ठ कृतियों की सर्जना कर हिन्दी साहित्य को अमूल्य धरोवर रूपी ग्रंथ प्रदान किये जिनमें निम्नलिखित कृतियाँ उल्लेखनीय है- विनय पत्रिका, कवितावली, रामलाल नहछू, वरवैरामायण, दोहावली, वैराग्य संजीवनी, रामाज्ञा प्रश्नावली, दोहावली, जानकी मंगल, पार्वती मंगल एवं कृष्ण गीतावली आदि-आदि।
गोस्वामी तुलसीदास ने भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन, भक्ति और कवित्य का अद्भुत समन्वयकारी रूप इन कृतियों में प्रस्तुत किया है। प्रवन्ध पटुता एवं सहृदयता का भावुकता, भक्ति भावना की शीलता एवं लोक नायकत्व के समस्त गुणों का समावेश दोहा, चौपाई, कवित्त-सवैया, सोरठा आदि समस्त शैलियों को प्रस्तुत किया।
गोस्वामी जी ने राम के महानायकत्व को प्रस्तुत कर चमत्कार और मंगलकारिणी शीतलता को जिस सहजता एवं गूढ़ रंजनकारी दृष्टि से पल्लवित किया है उसे विश्व काव्य-जगत का अद्भुत चमत्कार ही कह सकते हैं।
आज 400 सौ साल के बाद भी गोस्वामी तुलसीदास की कालजयी कृतियों का घर-घर वाचन और श्रवण होता है। विचारक इसमें गोते लगाते हुए नव्य नव्य नवनीत प्रस्तुत करते हैं। जितनी संभावनाओं की गहराइयाँ इसमें खोजी जा सकती हैं वे सभी इन ग्रंथों में छिपी हुईं हैं।
'तुलसी जयन्ती' पर उनका स्मरण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
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