पत्राचार
विभाग
पीछे
परिचय :
सरकारी-गैरसरकारी स्कूलों, कॉलेज के सेवारत हिंदी अध्यापकों, हिंदी सेवी संस्थाओं से संबद्ध नियमित हिंदी प्रचारकों के लिए संस्थान दो वर्ष की अवधि का हिंदी शिक्षण पारंगत (पत्राचार-सह-संपर्क पाठ्यक्रम) 1981 से चला रहा है।
[ वर्तमान सत्र : 2009-2011 में यह पाठ्यक्रम स्थगित है। ]
उद्देश्य :
पत्राचार विभाग द्वारा संचालित हिंदी शिक्षण पारंगत (पत्राचार) पाठ्यक्रम अध्यापक शिक्षा
में बी.एड. के समकक्ष मान्यता-प्राप्त है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य अहिंदी भाषा -भाषी राज्यों
के मान्यता प्राप्त माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के सेवारत हिंदी अध्यापकों को
आधूनिक /वैज्ञानिक प्रणाली से प्रशिक्षित करना है। पाठ्यक्रम की अवधि 24 माह है।
अध्यापक शिक्षा के पत्राचार माध्यम के इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत सेवारत अध्यापक अपने निवास
स्थान रहते हुऐ और अपने विद्यालयों से बिना अनुपस्थिति रहे पूरा प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
'सह-सम्पर्क कार्यक्रम' (contact programme) के लिए मात्र आरंभ में प्रशिक्षणार्थियों को
संस्थान द्वारा निर्धारित केंद्रों पर उपस्थित होना पड़ता है। सह-सम्पर्क कार्यक्रम की अवधि में
प्रशिक्षणार्थी संस्थान के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अपना शिक्षणाभ्यास (Teaching practice)
पूर्ण करते है। तथा पाठ्यक्रम के अन्य सैद्वांतिक विषयों का ज्ञान भी प्राप्त करते है।
विभागीय सदस्यः
शैक्षिक सदस्य

- प्रो. महेंद्र सिंह राणा, विभागाध्यक्ष
- डॉ. भरत सिंह पमार, रीडर
प्रशासनिक सदस्य
- श्री रतन बाबू, कार्यालय अधीक्षक
- श्रीमती मंजू नाथ, उच्च श्रेणी लिपिक
- श्री गोपाल सिंह चौहान, दफ्तरी
- श्री धर्म नाथ, चौकीदार
- श्री विजय प्रकाश, छात्रावास परिचारक
पाठ्यक्रम-विवरणः
(क) पाठ्यक्रम का नाम : हिंदी शिक्षण पारंगत (पत्राचार)
(ख) प्रवेश योग्यताएँ
1-
बी. ए. (हिंदी एक
मुख्य
वैकल्पिक विषय के साथ )
अथवा
2-
बी. ए.
(किसी भी विषय के साथ) और बी. ए. के समकक्ष भारत सरकार या
विश्वविद्यालयों
द्वारा मान्यता प्राप्त कोई हिंदी -उपाधि (डिग्री)
(ग) आवेदकों के लिए
आवश्यक सूचनाएँ :
[ वर्तमान सत्र : 2009-2011 में यह पाठ्यक्रम स्थगित है। ]
| 1. |
प्रशिक्षणार्थी
को प्रवेश के समय से प्रशिक्षण पूर्ण होने तक केंद्र सरकार अथवा राज्य
सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त या सरकारी विद्यालय में अध्यापन कार्य में
सेवारत होना चाहिए।
|
| 2. |
एक बार
पंजीकरण होने के बाद यदि आवेदक का किसी भी कारण से पंजीकरण समाप्त होता
है। तो उसका शुल्क किसी अन्य सत्र के लिए मान्य नहीं होगा। |
| 3. |
एक सत्र
का शुल्क किसी अन्य सत्र के लिए मान्य नहीं होगा।
|
| 4. |
पाठ्यक्रम की अवधि
में ऐसा ज्ञात होने पर
कि आवेदक ने गलत तथ्य प्रस्तुत किए है या
किन्हीं तथ्यों को छिपाया है, तो आवेदक का पंजीकरण समाप्त कर दिया जायेगा।
|
| 5. |
पाठ्यक्रम में
केद्रीय या राज्य सरकारों
द्वारा
मान्यता प्राप्त हिंदीतर भाषी राज्यों के ऐसे सेवारत अध्यापका प्रवेश पाने
के योग्य है, जिन्हें उनकी सरकारों या नियोजकों द्वारा अनुमत एवं संस्तुत
किया गया हो और जिनके आवेदन पत्र समक्ष अधिकारियों द्वारा विधिवत अग्रेषित
किए गए हों।
|
| 6. |
अनुसूचित
जाति /जनजाति एवं पिछड़ी जाति के अभ्यर्थियों के लिए भारत सरकार के
नियमानुसार क्रमश: 15;, 7.5;, और 27;, आरक्षण की व्यवस्था है। |
| 7. |
विकलांग
अभ्यर्थियों के लिए भारत सरकार नियमानुसार 3;, आरक्षण की व्यवस्था है। |
(घ) प्रवेश विधि
[ वर्तमान सत्र : 2009-2011 में यह पाठ्यक्रम स्थगित है। ]
| 1. |
प्रति
तीसरे वर्ष (फरवरी /मार्च हिंदी,अंग्रेजी तथा प्रादेशिक भाषा के लोकप्रिय
समाचार -पत्रों में विज्ञापन दिया जाता है। प्रवेश फार्म मंगाने के लिए
रु. 100/-(आवेदक शुल्क) का क्रॉस्ड पोस्टल ऑडर या बैंक ड्राफ्ट
सचिव,केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा -282005 के नाम बनवाकर भेजें जिसके
साथ रु. 50/-का डाक टिकट लगा अपना नाम पता लिखा (Self addressed envelope)
लिफाफा भी संलग्न हो।
|
| 2. |
आवेदन
पत्र उस विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रबंधक मंडल अथवा समक्ष शिक्षा
अधिकारी द्वारा अग्रेषित कराकर अग्रिम तिथि के पूर्व भेजा जाना चाहिए। डाक
व्यवस्था के कारण या किन्हीं और कारणों से देरी से प्राप्त आवेदन -पत्रों
पर विचार नहीं किया जाएगा।
|
| 3. |
आवेदन-पत्रों
की जाँच के बाद उपयुक्त पाए गए आवेदकों को प्रवेश की सूचना यथासम्भव भेजी
जाती है। पत्र व्यवहार अनापेक्षित है।
|
| 4. |
प्रवेश
की सूचना पाने के बाद निर्धारित समयावधि में आवेदक को निर्धारित शुल्क रु.
10,000/- (दस हजार मात्र) भेजना होगा।
|
विशेष:-
अभ्यर्थी
आवेदन पत्र के साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्रों, अंकतालिकाओं
(Marksheet) तथा जाति प्रमाण -पत्र, (प्रमाण-पत्र)की अभिप्रमाणित
(अटेस्टेड) प्रतियाँ अवश्य भेजें अन्यथा आवेदन पत्र पर विचार नहीं किया
जाएगा।
|
(ड.) पाठ्यक्रम का
सत्रारंभ और अवधि
हिंदी शिक्षण पारंगत (पत्राचार सह- संपर्क) पाठ्यक्रम का सत्रारंभ जुलाई
माह में होता है।इसकी अवधि 24 माह होगी।
[ वर्तमान सत्र : 2009-2011 में यह पाठ्यक्रम स्थगित है। ]
प्रश्न
-पत्र
सैध्दांतिक खंड
| प्रश्न-पत्र
1 |
शिक्षा
सिद्धांत, शैक्षिक प्रशासन एवं संगठन |
| प्रश्न-पत्र
2. |
शिक्षा
मनोविज्ञान,भारतीय शिक्षा का इतिहास और शिक्षा की समस्याएँ |
| प्रश्न-पत्र
3. |
भाषा
शिक्षण की विधियाँ |
| प्रश्न-पत्र
4. |
भाषा
विज्ञान |
| प्रश्न-पत्र
5. |
हिंदी
संरचना और भाषा तुलना प्रविधि |
| प्रश्न-पत्र
6. |
भाषा
परिमार्जन कार्य |
| प्रश्न-पत्र
7. |
हिंदी
साहित्य |
प्रायोगिक
खंड : शिक्षणाभ्यास
| 1. |
कक्षा
शिक्षणाभ्यास |
| 2. |
आंतरिक
परीक्षा
|
| 3. |
बाह्य
परीक्षा
आंतरिक
मूल्यांकन और अंक विभाजन
- प्रत्येक छात्र को प्रत्येक
प्रश्नपत्र में लगभग 15-20 पाठ भेजे जाएँगे।
- इन पाठों के साथ भेजे गए सभी
मूल्यांकन प्रश्नों के उत्तर लिखकर पाठ
मिलने के बाद भेजे गए सभी मूल्याकंन प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार
लिखकर पाठ मिलने के 30 दिन के भीतर वापस भेजना अनिवार्य है।
- लिखित प्रश्नपत्र (1 से 6 तक ) 80
-80 अंको के होंगे, सातवाँ
प्रश्नपत्र 60 अंकों का होगा। प्रश्नपत्रों का अंक विभाजन निम्नलिखित
प्रकार से होगा:
| प्रश्न
पत्र |
लिखित |
अभ्यास
कार्य(उत्तर
पुस्तिकाओं
से) |
मौखिक |
योग |
| 1. |
80 |
20 |
- |
100 |
| 2. |
80 |
20 |
- |
100 |
| 3. |
80 |
20 |
- |
100 |
| 4. |
80 |
20 |
- |
100 |
| 5. |
80 |
20 |
- |
100 |
| 6. |
80 |
20 |
- |
100 |
| 7. |
80 |
20 |
- |
100 |
|
| 4. |
प्रश्नपत्रों के अभ्यास -पाठों में
अंकों की गणना विधि निम्नलिखित है-
मान लीजिए संस्थान ने किसी प्रश्नपत्र मे अठारह पाठ भेजे और छात्र ने 12
पाठों के उत्तर भेजे। इन 12 पाठों में उसे कुल 180 अंक प्राप्त किए तो-
चूँकि 360
में प्राप्तांक
- 180
इसलिए 20
में प्राप्तांक
- 180 x 20 / 30
|
| 5. |
प्रत्येक छात्र के लिए कम से कम 80
प्रतिशत पाठों के उत्तर -पत्रक भेजना अनिवार्य है। |
| 6. |
जो छात्र निर्धारित समय में 80
प्रतिशत
पाठों के उत्तर नहीं भेंजेगे, उन्हें लिखित परीक्षा
में सम्मिलित नहीं किया जाएगा। |
| 7. |
उत्तर पत्रकों को नियमित रुप से
भेजना
अनिवार्य है, एक साथ दो-तीन माह के उत्तर-पत्रकों को
स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधूरे उत्तर अस्वीकृत होंगे।
यदि छात्र इन कार्यों में नियमित नहीं रहता तो उसे एक ज्ञापन
(Notice) दिया जाएगा। इसके बाद भी नियमित न रहने पर उसका पंजीकरण समाप्त
कर दिया जाएगा। |
(च) संपर्क
कार्यक्रम
एवं प्रायोगिक परीक्षा
- इस पत्राचार माध्यम पाठ्यक्रम का
अनिवार्य
भाग है, संपर्क कार्यक्रम । यह लगभग 60 दिन की अवधि का होता है। प्रत्येक
छात्र के लिए इसमें भाग लेना अनिवार्य है।
(क)प्रारम्भ में 18 दिन का शिक्षणपरक पाठ्यक्रम आगरा में आयोजित किया
जाएगा। शेष 42 दिनों के शिवर में
छात्राध्यापक 40 पाठों का शिक्षण करेगा। तथा प्रायोगिक परीक्षा देगा।
- संपर्क -कार्यक्रम निर्धारित केंन्द्रों
पर
आयोजित किए जाते है। जिसकी सूचना छात्र को कार्यक्रम प्रांरम्भ होने की
तिथि से लगभग 20/25 दिन पूर्व दी जाती है।
- छात्र अपनी छुट्टियों की व्यवस्था स्वंय
करके इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
छुट्टियों के संबंध में संस्थान का कोई दायित्व नहीं है। छात्र अपने साथ
विद्यालय का निवृत्ति प्रमाण पत्र एवं संस्थान द्वारा प्रदत्त परिचय -पत्र
अवश्य लाएँगें।
- संपर्क - कार्यक्रम केंद्र पर रहने और भोजन आदि की
व्यवस्था
करना संस्थान का दायित्व नहीं है | छात्रो को स्वंय
अपनी व्यवस्था
करनी होगी | शिक्षण
अभ्यास,प्रायोगिक परीक्षा तथा सावतें प्रश्नपत्र की 20 अंकों की उच्चारण
(अभिव्यक्ति) परीक्षा होती है।सैधांतिक प्रश्नपत्रों के विषयों का
अध्यापन भी किया जाता है।
- इस कार्यक्रम में शिक्षण अभ्यास,
प्रायोगिक परीक्षा तथा साववें प्रश्नपत्र की 20अंकों की उच्चारण
(अभिव्यक्ति) परीक्षा होती है। सैध्दांतिक प्रश्नपत्रों के विषयों का
अध्यापन भी किया जाता है।
- जो छात्र बीमारी अथवा किसी गंभीर
कारणों से संपर्क कार्यक्रम में सम्मिलित न हो सकने की सूचना, (प्रमाण
सहित) कार्यक्रम प्रारंम्भ होने के पूर्व या प्रारम्भ होने के सात दिन बाद
तक दे देते हैं तो उन्हें चालू सत्र में लिखित परीक्षा के पूर्व
सामान्यत: एक अंतिम अवसर दिया जाएगा।
- जो छात्र उक्त अंतिम अवसर का उपयोग
किसी भी कारण से नहीं करते, उन्हें लिखित परीक्षा में सम्मिलित नहीं किया
जाएगा।
- संपर्क- कार्यक्रम की अवधि में
विभागाध्यक्ष के निर्देशानुसार पूर्ण अनुशासित आचरण अनिवार्य है, ऐसा न
होने पर विभागाध्यक्ष की संस्तुति पर संस्थान किसी भी अनुशासनहीन
प्रतिभागी का पंजीकरण समाप्त कर सकता है।
(छ) लिखित
परीक्षा
के
संबध में आवश्यक सूचनाएँ :
- भेजे
गये पाठों
के कम से कम 80 प्रतिशत उत्तर लिखकर संस्थान को लौटाने वाले छात्र ही
लिखित परीक्षा में बैठने के अधिकारी होंगे।
- प्रत्येक
छात्र
से 80 प्रतिशत उत्तर - पत्रक प्राप्त होने पर ही परीक्षा में
सम्मिलित होने का अनुमति पत्र भेजा जाता है, यही वैध
अधिकार -पत्र
है।
- निर्धारित
तारीख तक
वांछित उत्तर -पत्रक न भेजने वाले छात्र लिखित परीक्षा में
सम्मिलित
नहीं किए जाते हैं तो तिथि उनकी संपर्क -कार्यक्रम की परीक्षाएँ भी निरस्त
कर दी
जाती है।
- लिखित परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए
प्रत्येक
छात्राध्यापक को परीक्षा आवेदन -पत्र भरना
होता है।
आवेदन -पत्र कुलसचिव, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा-282005 के कार्यलय
से भेजा जाएगा। आवेदन -पत्र के साथ निर्धारित शुल्क का क्रॉस्ड बैंक
ड्राफ्ट सचिव,केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा के नाम से बनवाकर केंद्रीय
हिंदी संस्थान, आगरा को भेजा जाए।
- पाठ्यक्रम की लिखित वार्षिक परिक्षाएँ प्राय:
जून माह में संस्थान द्वारा निर्धारित केंद्रों पर आयोजित की जाती हैं।
- परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए मार्गव्यय
और किसी प्रकार के भत्ते नहीं दिए जाएँगे।
- सैध्दांतिक तथा प्रायोगिक परीक्षा के लिए इस
पाठ्यक्रम में पृथक-पृथक श्रेणियाँ प्रदान की
जाती
है।उत्तीर्णता के लिए पूर्ण योग में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक तथा प्रत्येक
प्रश्नपत्र में 30 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। जो
परीक्षार्थी पूरी परीक्षा देकर पूर्ण योग में 40 प्रतिशत से कम अकं पाएगा
वह उन सभी प्रश्नपत्रों में जिनमें उसे 40 प्रतिशत से कम अंक मिले है,
अनुर्तीर्ण घोषित किया जाएगा। अनुतीर्ण प्रश्नपत्रों में पुन: परीक्षा
देने की अनुमति दी जाएगी जिनमें उसे 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे।
उत्तीर्णता की निम्नलिखित श्रेणियाँ होंगी:
| उत्तीर्ण श्रेणी |
40 से 47 प्रतिशत |
| द्वितीय श्रेणी |
48 से 59 प्रतिशत |
| प्रथम श्रेणी |
60 प्रतिशत और अधिक |
- असफल परीक्षार्थी रु. 140.00 /- परीक्षा
शुल्क सहित निर्धारित आवेदन -पत्र
पर आवेदन करने पर उन प्रश्नपत्रों में निजी रुप में परीक्षा दे सकेगा।
जिनमें वह असफल हुआ।
- जो छात्र संपर्क -कार्यक्रम
में सम्मिलित हो चुके हैं लेकिन किसी रोग या गंभीर और उपर्युक्त कारण से
लिखित परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो पाते, उन्हें इस तथ्य की
प्रमाण सहित सूचना देने पर,
यदि संस्थान कारणों को उपयुक्त समझता है। तो, अगले वर्ष की अप्रैल माह में
होने वाली पूरक परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति प्रदान कर सकता है।
- यदि
इस परीक्षा में भी छात्र उपयुक्त कारण से परीक्षा में सम्मिलित
नहीं होता तो कारण से संतुष्ट होने पर,
संस्थान उन्हें नियमानुसार परीक्षा के तीन अवसर प्रदान करेगा।
- उत्तर पत्रों की निर्धारित संख्या को
पूरा करने के लिए दोबारा अवसर नहीं दिया जाता।
ऊपर की
ओर