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शिलांग केंद्र स्थापना शिलांग केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी।पता: लोवर लाच्छुमियर, शिलांग, 793014 (मेघालय)दूरभाष: 0364-227097 फैक्स: 0364-2227097 उद्देश्य राज्य में सेवारत हिंदी शिक्षकों के लिए लघुअवधीय नवीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। इन नवीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को भाषाशिक्षण की नवीन प्रविधियों से परिचित कराया जाता है तथा उन्हें मानक हिंदी के प्रयोग के प्रति सतत् जागरूक रखने का प्रयास किया जाता है।संकाय सदस्य शैक्षिक वर्ग
प्रशासनिक वर्ग
कार्यक्षेत्र मेघालय, मिज़ोरम व त्रिपुरा राज्य हैं। पाठ्यक्रम
प्रतिवेदन 88 वाँ नवीकरण पाठयक्रम, बाघमारा केंद्रीय हिंदी संस्थान के शिलांग क्षेत्रीय केंद्र द्वारा 88 वें नवीकरण पाठ्यक्रम का औपचारिक दिनांक 16.01.08 को डॉ. विद्याशंकर शुक्ल, क्षेत्रीय निदेशक की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर एस. डी. आई. ऑफ स्कूल्स श्री डी. मारक मुख्य अतिथि रहे एवं विशिष्ट कोऑर्डिनेटर, सर्व शिक्षा अभियान, श्री. बी. एम. माराक तथा रांकु बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बाघमारा के उप प्रधानाध्यापक रहे। इस समारोह में मेघालय राज्य के दक्षिण गारो हिल्स जिले के माध्यमिक विद्यालय के 24 हिंदी शिक्षक प्रतिभागी एवं स्थानीय हिंदी प्रेमी तथा गणमान्य सदस्य उपस्थित रहें। दिनांक 15.01.08 को प्रतिभागियों का पंजीकरण एवं पूर्व-परीक्षण का कार्य संपन्न करने के पश्चात् उसी दिन से कक्षाएँ प्रारंभ हो गयीं। इस पाठयक्रम में निम्नलिखित अध्यापकों ने क्रमानुसार निम्नलिखित विषयों का अध्यापन किया- डॉ. विद्याशंकर शुक्ल- हिंदी शिक्षण विधियाँ एवं पाठ नियोजन, श्री विपलेंदु कुमार सिंह- भाषा परिमार्जन एवं व्यावहारिक हिंदी संरचना अभ्यास, सुश्री काकोली गोगोई- हिंदी संरचना तथा व्याकरण एवं पत्रलेखन तथा सुश्री शाईनी के साङमा- सामान्य भाषा विज्ञान एवं व्यावहारिक हिंदी संरचना अभ्यास। इसके साथ ही भाषा-कौशलों का व्यावहारिक रूप से अलग-अलग अध्यापन भी हुआ। प्रतिभागियों से प्रतिदिन वार्तालाप की कक्षाएँ भी आयोजित की गयीं। इस पाठयक्रम में तीन विशेष व्याख्यान भी आयोजित किए गए। 1. श्री दिलीप कुमार साहा, प्रधानाध्यापक, रांकु बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बाघमारा, 2. श्री डी. आर. माराक, एस, डी. आई. ऑफ, स्कूल्स, बाघमारा एवं 3. श्री बी. एम. माराक, कोऑर्डिनेटर, सर्वशिक्षा अभियान, बाघमारा। अध्यापन के बाद प्रतिभागियों का पर-परीक्षण भी लिया गया, जिसमें प्रथम स्थान- श्रीमती सुजला साङमा, द्वितीय स्थान- श्री पारस नाथ पाण्डेय एवं तृतीय स्थान- सुश्री मिठु विश्वास ने प्राप्त किया। इन तीनों प्रतिभागियों को समापन समारोह में पुरस्कार स्वरूप पुस्तकें भेंट की गयीं। दिनांक 04.02.08 के समापन समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता श्री दिलीप कुमार साहा, रांकु बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बाघमारा के प्रधानाध्यापक ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री एस. के. मोमिन, उप कमिश्नर, बाघमारा के प्रधानाध्यापक ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री एस. के मोमिन, उप कमिश्नर, बाघमारा रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री, एस. डी. माराक, एस. डी. आई, ऑफ स्कूल्स, साउथ गारो हिल्स, बाघमारा रहे। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए और हिंदी का प्रचुर मात्रा में प्रसार करने का संकल्प भी लिया। प्रतिभागियों की प्रतिभागियों में हिंदी के प्रति काफी सकारात्मकता दिखायी दी। मेघालय के इस साउथ गारो हिल्स जिले के मुख्यालय में यह हिंदी का पहला प्रसार कार्यक्रम था। इस नवीकरण कार्यक्रम के आयोजन में मेघालय राज्य के अधिकारियों, राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों का सहयोग उल्लेखनीय रहा। पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय केंद्र की हिंदी अर्द्धवार्षिक पत्रिका 'समन्वय पूर्वोत्तर ' का लोकार्पण केंद्रीय हिंदी संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र- गुवाहाटी, शिलांग एवं दीमापुर के सम्मिलित प्रयास से समन्वय ' पूर्वोत्तर पत्रिका ' का लोकार्पण समारोह शिलांग केंद्र द्वारा दिनांक 18-02-08 को केंद्र परिसर में आयोजित किया गया । इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय श्री अतुल कुमार माथुर, भारतीय पुलिस सेवा ( आई.पी.एस्.), अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक , मेघालय राज्य सरकार ने की । इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री एल.रॉय. भारतीय प्रशासनिक सेवा ( आई.ए.एस.), शिक्षा सचिव, मेघालय राज्य सरकार एवं विशिष्ट अतिथि के रुप में श्री एस लामारे, अध्यक्ष, खासी भाषा विभाग, एडमंड कॉलेज, शिलांग एवं श्रीमती एस. ड्खार, प्रोफेसर, खासी भाषा विभाग, नेहू (शिलांग) की उपस्थिती उल्लेखनीय रहीं । मुख्य अतिथि ने पत्रिका का लोकार्पण करते हुए कहा कि -" निःसंदेह यह एक सराहनीय प्रयास है । मेरा पूरा विश्वास है कि इस पत्रिका के माध्यम से पूर्वोत्तर की भाषाएँ, संस्कृतियाँ एवं साहित्य पूरे भारत में प्रसारित होगा, लोग एक-दूसरे को जानेंगे , आपस में समरसता बढे़गी और एकता सुदृढ़ होगी ।" केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक प्रोफेसर विद्याशंकर शुक्ल ने सभी अतिथियों एवं आगन्तुकों का स्वागत किया । सभा का समापन पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के सचिव श्री अकेला भाइ के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ । नवीकरण प्रतिवेदन (फरवरी 2008 - मई 2008) मिजोरम के लिए केंद्रीय हिंदी संस्थान के अनुसंधान एवं भाषा विकास विभाग, शिलांग केंद्र एवं मिजोरम बोर्ड ऑफ स्कूल एजूकेशन के सम्मिलित प्रयास से प्राथमिक विद्यालय के कक्षा-3 एवं कक्षा-4 के छात्रों के लिए निर्मित जोरम भारती भाग-1 एवं भाग-2 पाठ्यपुस्तकों के प्रशिक्षण का आयोजन नव नियुक्त प्राथमिक हिंदी अध्यापकों के लिए दि. 25 फरवरी, 2008 से दि. 21 मार्च, 2008 तक चार चरणों में आइजोल एवं लुङलेई में किया गया। ये सभी कार्यक्रम केंद्रीय हिंदी संस्थान के शिलांग केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. विद्याशंकर शुक्ल एवं मिजोरम बोर्ड ऑफ स्कूल एजूकेशन के निदेशक (शैक्षिक) श्री वनरमछुआङा के निर्देशन में हुआ। प्रथम प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 25.02.08 से 29.02.08 तक आइजोल के डाइट हाल में हुआ। इसमें मिजोरम राज्य के सेरछिप, मामित जिले के सभी प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक एवं आइजोल जिले के 76 अध्यापकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मिजोरम राज्य के स्कूल एजूकेशन की शिक्षा निदेशक श्रीमती थाङी ने कहा “हिंदी पठन-पाठन हमारे भारतीय होने की पहचान है। मिजोरम राज्य के लोग शांति का रास्ता अपनाकर राज्य के विकास में भरपूर कोशिश में लगे हुए हैं। पूर्वोत्तर का यह पहला राज्य है जहाँ सरकारी स्कूलों के प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-3 से एवं माध्यमिक स्कूलों के कक्षा-8 तक हिंदी अनिवार्य रूप में पढ़ाई जा रही है इसके लिए नये अध्यापकों की नियुक्ति हुई है और आगे भी नियुक्ति होने की संभावना है। केंद्रीय हिंदी संस्थान ने हमारे लिए पाठ्य पुस्तकों का निर्माण किया और हमारे अध्यापकों को पुस्तकीय एवं अन्य भाषायी दक्षता में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण देने का कार्य भी कर रहा है। हम राज्य की ओर से संस्थान के आभारी हैं।” इस पाठ्यक्रम में डॉ. विद्याशंकर शुक्ल, डॉ. अशोक मिश्र, श्री वी.एल. लोमा, श्री सुमित त्रिपाठी, श्रीमती ललरमथङी, श्रीमती वी.एल. रूआती, श्रीमती साराह ने अध्यापन कार्य किया। समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रोत्साहन हेतु परीक्षण में अधिक अंक पाने वाले तीन प्रतिभागियों को पुरस्कार स्वरूप पुस्तकें भेंट की गयीं। दिनांक 03.03.08 से दिनांक 07.03.08 तक दूसरे चरण का प्रशिक्षण कार्यक्रम लुङलेई के एम.बी.एस.ई. केंद्र के हॉल में आयोजित किया गया। इसमें लुङलेई, साइहा, लुङत्लाई जिले के कुल 136 प्रतिभागी अध्यापकों ने भाग लिया। पूरा कार्यक्रम क्षेत्रीय केंद्र एम.बी.एस.ई. के क्षेत्रीय अधिकारी श्री सी. साङलियाना एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलांग के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. विद्याशंकर शुक्ल की देख-रेख में आयोजित किया गया। दिनांक 10.03.08 से दि. 14.03.08 तक प्रशिक्षण के तीसरे चरण का आयोजन आइजोल के एम.बी.एस.ई. केंद्र के हॉल में किया गया। इसमें मिज़ोरम राज्य के आठों ज़िलो के अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालयों के हिंदी अध्यापकों को आमंत्रित किया गया। इसमें कुल 54 अध्यापकों ने भाग लिया। दिनांक 17.03.08 से दिनांक 21.03.08 तक चौथे चरण के कार्यक्रम में कोलासिव और चम्फाई जिले के 85 अध्यापकों ने भाग लिया। इसका उद्घाटन दिनांक 17.03.08 को केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो.शंभुनाथ ने एम.बी.एस.ई. आइजोल के सभागार में किया। मिजोरम राज्य सरकार की ओर से एम.बी.एस.ई. के सहायक निदेशक (शैक्षिक) श्री के.जे. थामस ने मिजोउ की परंपरा के अनुसार मुख्य अतिथि प्रो. शंभुनाथ जी का स्वागत किया। प्रतिभागियों द्वारा स्वागतगान हिंदी में प्रस्तुत किया गया। एम.बी.एस.ई. के निदेशक (शैक्षिक) ने तीनों चरणों के कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए संक्षिप्त प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि प्रो. शंभुनाथ जी ने अपने वक्तव्य में “भाषा और संस्कृति के अनुरक्षण के लिए लोक साहित्य को सजाने और उसकी विरासत को सहेजने का आह्वान किया।” अपने वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि “लोक साहित्य ही लोक में (पूरे विश्व में) वैश्विक चेतना का आलोक फैला सकता है कि और पारंपरिक मान्यता भी यही रही है कि पूरब से आलोक फैलता है। उन्होंने अध्यापकों के लिए संदेश दिया कि वे अपनी कुशल अध्यापन कला के द्वारा मिजोरम के भविष्य को संवारें और भारत को शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में अधिक मजबूत बनाएँ। हिंदी का इतना ज्ञान छात्रों को करा दें कि वे पूरे भारत में हिंदी के माध्यम से भ्रमण कर सकें और अपनी रोज़ी-रोटी में हिंदी को सहायक बना सकें।” निदेशक प्रो. शंभुनाथ जी ने मिजोरम हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय, द्रुत्लाङ, आइजोल का संदर्शन किया। निदेशक महोदय ने सभी को संबोधित करते हुए हिंदी के और मिजो भाषा के उत्थान पर बल देते हुए हिंदी की कुशल अध्यापन कला को विकसित करने की वकालत की। निदेशक महोदय ने प्राचार्य श्री शिव कुमार को एक अलग से भाषा अनुसंधान केंद्र भी स्थापित करके मिजोरम राज्य की जन-जातीय भाषाओं जैसे – लुशाई, पोई, लाखेर, राल्ते, पाइते, म्हार एवं चकमा आदि को अनुरक्षित करके उन्हें समृद्ध करके एवं हिंदी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय हिंदी संस्थान इसमें पूरा सहयोग करेगा। मिजोरम में हिंदी के विकास की संभावना के कार्यक्रम के अंतर्गत ही निदेशक महोदय ने दिनांक 17.03.08 को सायंकाल मिजोरम सरकार के उच्च एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री से उनके निवास पर मुलाकात की। उनके साथ श्री शिवकुमार, सुश्री लत्ललमुआनी, डॉ. विद्याशंकर शुक्ल एवं डॉ. अशोक मिश्र रहे। इसी क्रम में दिनांक 18.03.08 को ही मिजोरम हिंदी प्रचार सभा, आइजोल के कार्यालय गए और सभा के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। सभा के अध्यक्ष श्री जे.एच. जौएना ने निदेशक महोदय का पारंपरिक स्वागत किया। सभा के सचिव ने सभा में अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए आगरा में प्रशिक्षण देने व्यवस्था करने की मॉंग की। कुछ वर्षों से रुके हुए विशेष गहन के एक वर्षीय पाठ्यक्रम को पुनः प्रारंभ करने का अनुरोध किया गया। दिनांक 20.03.08 को समापन समारोह मिजोरम राज्य सरकार के उच्च एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने किया। समापन भाषण में शिक्षा मंत्री ने कहा कि “अध्यापक विद्यार्थी को केवल विषय का कोरा ज्ञान नहीं कराता है बल्कि उसके भीतर छिपी हुई प्रतिभा को जौहरी की तरह परखकर उसे निखारता है, जीवन में आने वाली चुनौतियों, कठिनाइयों, का सामना करने के लिए तैयार करता है, जिससे वह अपनी और अपने राज्य की, अपने देश की तरक्की कर सके।” केंद्रीय हिंदी संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र : शिलांग द्वारा आयोजित दिनांक 05.05.08 से 23.05.08 तक सी.आर.सी. हॉल आइजोल, मिजोरम के 90वाँ नवीकरण पाठ्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। इस अवसर पर निदेशालय, स्कूल एजूकेशन मिजोरम सरकार की निदेशक श्रीमती मलसोमथाङी मुख्य अतिथि ने प्रेरक उद्बोधन देते हुए कहा कि हिंदी के प्रति रुचि रखना और विकास करना हम सब का राष्ट्रीय कर्तव्य है। मिजोरम के हिंदी अध्यापक हिंदी अच्छी तरह से स्वयं सीखें और फिर उत्साहपूर्वक छात्रों को भी हिंदी सिखाएँ। साथ ही इस बात की भी सूचना दी कि हिंदी के अध्ययन अध्यापन में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए हिंदी सेवा समूह गठित किया गया है। इस सेल के द्वारा यह पता किया जाएगा कि नवीकरण जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दी जानेवाली नई-नई जानकरी का समुचित उपयोग अपने-अपने विद्यालयों में हिंदी अध्यापकों द्वारा किया जा रहा है अथवा नहीं। अतिथि वक्तव्य की श्रृंखला में विशिष्ट अतिथि शिलांग केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. विद्याशंकर शुक्ल ने केंद्रीय हिंदी संस्थान के भौतिक (केंद्र विस्तार) और शैक्षिक स्वरूप का परिचय दिया साथ ही संस्थान के द्वारा हिंदी विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता और संचालन का संयुक्त संपादन आइजोल ईस्ट-I के ए.एच.पी.ओ. श्री ललरमपना ने किया। नवीकरण पाठ्यक्रम में कुल 66 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस सत्र का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक मिश्र ने किया। दिनांक 05.05.08 से 23.05.08 की अवधि में शैक्षिक वर्ग के सदस्यों द्वारा शिक्षा की अधुनातन प्रणाली द्वारा भाषा कौशल, भाषा शिक्षण प्रविधि, भाषा विज्ञान का सैद्धांतिक अध्ययन, हिंदी संरचना की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ हिंदी के पाठ्यक्रम में अध्यापकों द्वारा अनुभव की जानेवाली विषय, शिल्प और व्याकरण संबंधी कठिनाइयों का निराकरण भी किया। दिनांक 22.05.08 को इस पाठ्यक्रम के समापन समारोह में मिजोरम के उच्च शिक्षा मंत्री एवं मुख्य अतिथि ने अपने प्रभावपूर्ण वक्तव्य में कहा कि शिक्षा जगत् में हो रहे नित नए परिवर्तनों और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में हो रही बढ़ोत्तरी की जानकारी शिक्षक को होनी चाहिए। इस अवसर पर शिक्षा निदेशालय के अधिकारी वर्ग एवं शैक्षिक वर्ग के प्रबुद्धजनों ने उपस्थित होकर समापन समारोह की शोभा बढ़ायी। कार्यक्रम का कुशल संचालन और अध्यक्षता आइजोल ईस्ट-I की स्थानीय शिक्षा अधिकारी श्री ललरमपना ने की। वर्ष 2006-07 में हुए नवीकरण पाठयक्रमों का विवरण
वर्ष 2007-08 में हुए नवीकरण पाठयक्रमों का विवरण
वर्ष 2008-09 में हुए नवीकरण पाठयक्रमों का विवरण
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