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डॉ. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव प्रसार व्याख्यानमाला का आयोजन “कॉर्पस-अनुसंधान ही तय करेगा हिंदी के भविष्य का नक़्शा” डॉ. गिरीशनाथ झा ‘हिंदी संहित विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रौद्योगिकीय विकास के लिए हमें एक विशाल और व्यापक आधार वाले कॉर्पोरा की आवश्यकता है। हिंदी का कॉर्पस-आधारित सतत भाषिक विश्लेषण आने वाले समय में हिंदी भाषा संसाधान के विभिन्न सैद्धांतिक एवं अनुप्रयुक्त विषय क्षेत्रों को पोषित संवर्धित करेगा।’ हिंदी में कॉपर्स-आधारित अनुसंधान की भविष्यगामी संभावनाओं के संकेत देने वाले ये विचार हैं विशिष्ट संस्कृत अध्ययन केंद्र, जे.एन.यू. के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गिरीशनाथन झा के। डॉ. झा सूचना तथा भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित डॉ. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव प्रसार व्याख्यानमाला (दि. 22-23 मार्च, 2010) में विशेष व्याख्यान देने के लिए पधारे थे। दो-दिवसीय व्याख्यानमाला का उद्घाटन करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. रामवीर सिंह ने हिंदी भाषा के अनुप्रयुक्त एवं प्रयोजनमूलक अध्ययन-विश्लेषण की आधारभूमि तैयार करने वाले प्रोफेसर रवींद्रनाथ श्रीवास्तव का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि आज डॉ. श्रीवास्तव द्वारा आरंभ किए गए कार्यों की दिशा में समयानुकूल प्रयास करने की ज़रूरत है। इससे पहले हिंदी कॉर्पोरा परियोजना के प्रभारी श्री केशरी नंदन ने डॉ. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित करते हुए संक्षिप्त परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किया। दो दिवसीय व्याख्यानमाला के पहले व्याख्यान का विषय था “हिंदी भाषा-संसाधन और कॉर्पस भाषाविज्ञान” जिसमें डॉ. झा ने हिंदी भाषा संसाधन की सैद्धातिक और प्रयोजनपरक अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसके साथ कॉर्पस भाषाविज्ञान के संबंध और अनुप्रयोगों की चर्चा की। इसी क्रम में उन्होंने कॉर्पस निर्माण की विभिन्न प्रविधियों की जानकारी दी और प्रत्येक के गुण-दोष का व्यावहारिक विवेचन किया। डॉ. झा ने सपाट (Flat) और बहुस्तरीय (Hirercial) टैगिंग पद्धतियों पर भी प्रकाश डाला और कॉर्पस के मानकीकरण के प्रश्न को उठाया। उन्होंने इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही संस्थाओं एवं उनकी परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर और चर्चा सत्र में हिंदी शिक्षण निष्णात पाठ्यक्रम के कंप्यूटर साधित हिंदी भाषा संसाधन के शिक्षणार्थियों ने कॉर्पोरा और टैगिंग के अलावा कंप्यूटरी भाषा विज्ञान एवं हिंदी भाषा संसाधन में बहुभाषी कॉर्पोरा की भूमिका पर विद्वान वक्ता से उपयोगी जानकारी प्राप्त की। व्याख्यानमाला के दूसरे दिन डॉ. झा ने ‘कॉर्पस भाषाविज्ञान के विविध अनुप्रयोग और संदर्भित समस्याओं’ पर केंद्रित व्याख्यान दिया जिसमें उन्होंने कंप्यूटरी भाषाविज्ञान के सैद्धांतिक एवं अनुप्रयोगात्मक पक्षों पर निर्माण संबंधी अपनी परियोजना की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि डॉ. झा जे.एस.यू. के विशिष्ट संस्कृत अध्ययन केंद्र में संस्कृत निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं और शोधकार्यों के निर्देशक के रूप में विख्यात हैं और कॉर्पस अनुसंधान के क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं के परस्पर सहयोग के पक्षधर हैं। “संस्कृत भारत की साझी सांस्कृतिक बौद्धिक आश्रय लेकर भारतीय भाषाओं में परस्पर संवाद की तकनीकी संभावनाएँ तलाशी और तराशी जा सकती है।” इस कथन के साथ डॉ. झा ने संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षण प्रशिक्षण एवं सामग्री निर्माण की दृष्टि से हिंदी कॉर्पोरा परियोजना में संकलित कॉर्पस के बहुउद्देशीय संसाधन एवं विकास पर बल दिया। दूसरे दिन के प्रश्नोत्तर एवं चर्चा में हिंदी कॉर्पोरा परियोजना से जुड़े सदस्यों ने परियोजना के कार्यों की जानकारी देते हुए विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। अंत में कार्यक्रम के संचालक एवं सू.भा.प्रौ.विभाग के प्रभारी ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद देते हुए आशा व्यक्त की कि डॉ. झा के विद्वत्तापूर्ण और उपयोगी व्याख्यानों एवं दोनों दिन की चर्चा से संस्थान की हिंदी कॉर्पोरा परियोजना की आगामी भूमिका और दिशा तय करने में मदद मिलेगी। डॉ. गिरीशनाथ झा द्वारा प्रस्तुत दोनों व्याख्यान की पावर प्वॉइंट प्रस्तुतियाँ देखने के लिए इन लिंक पर क्लिक करें -- प्रस्तुति-- 1 Language Processing and Corpus Linguisticsप्रस्तुति-- 2 Indian languages corpora and application development |