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मोटूरि सत्यनारायण जी |
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मोटूरि सत्यनारायण जी का संक्षिप्त जीवन-परिचय केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के संस्थापक, प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पदमभूषण से अलंकृत श्री मोटूरि सत्यमारयण जी का जन्म 15 अगस्त, 1902 को आंध्र प्रदेश में कृष्ण जिले के दोण्डपा़डू गांव में हूआ था । उनका मत था कि भाषा सार्वजनिक समाज की वस्तु है । अतः इसका विकास भी सामाजिक विकास के साथ-साथ ही चलना चाहिए और केंद्रीय हिदी संस्थान को भाषायी प्रयोजनात्मकता को अपने कार्य़ का केंद्रीय बिन्दु बनाकर आगे बढना चाहिए । आप प्रयोजनमूलक हिंदी आंदेलन के जन्मदाता थे । उन्होंने संस्थान द्वारा इस आंदोलन को संचालित किया । आपके द्वारा संस्थापित अन्य संस्थाएँ हैं-अखिल भारतीय हिंदी परिषद, आगरा, भारतीय संस्कृति संगम, दिल्ली, तेलगु भाषा समिति, मद्रास और हैदराबाद , हिंदी विकास समिति, मद्रास एवं दिल्ली और हिंदुस्तामी प्रचार सभा, वर्धा आदि । आप केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल आगरा के अध्यक्ष रहे हैं । आप विभिन्न शैक्षिक , तकनीकी, सांस्कृतिक भाषा समिति, साहित्यिक एवं शैक्षिक संस्थाओं के सक्रिय सदस्य रहे हैं और इनकी उन्नति में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा है । संस्थान के अखिल भारतीय हिंदी सेवा सम्मान योजना के अंतर्गत सन् 1989 में हिंदी प्रचार-प्रसार एवं हिंदी प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए आपको गंगाशरण सिंह पुरस्कार से सम्मानित करके संस्थान स्वयं गौरवान्वित हुआ । इस योजना के अंतर्गत सन् 2002 से भारतीय मूल के विद्वान को विदेशों में हिंदी के प्रचार एवं प्रसार के उल्लेखनीय कार्य के लिए आपके नाम से पुरस्कृत किया जाता है, जिसके अंतर्गत 5 विद्वानों को अब तक सम्मानित किया जा चुका है । हिंदी और हिंदी के माध्यम से अनेकों विद्वानों को उँचाई तक पहूँचाने का श्रेय. आपको जाता है । आप और हिंदी सेवा एक दूसरे के पर्याय थे, हैं और रहेंगे । आप 6 मार्च 1995 से हमारे बीच नहीं रहे, तथापि चाँद और सुरज की भाँति आप सदैव हमारे बीच विद्यामान रहेंगे । |