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विदेशी भाषा के रूप में हिंदी विश्व के लगभग 165 विश्ववविद्यालयों/ संस्थाओं में विदेशी भाषा कें रुप में हिन्दी का अध्यापन हो रहा है। इन संस्थाओं में इस प्रकार के कार्यक्रमों के विभिन्न आयामों में काफ़ी असमानता है। कुछ स्थानों पर हिंदी अध्यापन के कार्यक्रम प्रारंभिक स्तर पर चलाए जा रहें है , तथा कुछ विश्वविद्यालयो में शोध स्तर पर। किन्तु इन सभी स्थानों पर पाठ्यक्रमों की सामग्री, शिक्षण अवधि, शिक्षण सामग्री का प्रकार तथा शिक्षण विधि की दृष्टि से काफी भिन्नता मिलती है। ये संस्थाएँ/ विश्वविद्यालय सामान्यतया इन कार्यक्रमों को अपने शैक्षिक कार्यक्रमों के साथ मिला देते हैं । परिणामत: छात्रों को अनेक विश्वविद्यालय में जाना होता है। ज्यादातर उन्हें अपने पिछले हिंदी अध्ययन के लाभ को छोड़कर एक नई शुरुआत करनी पड़ती है।केंद्रीय हिंदी संस्थान 1971 से विदेशियों के लिए हिंदी शिक्षण के कार्यक्रम संचालित कर रहा है। पिछले 34 वर्षो में संस्थान ने लगभग 50 देशों के करीब 2000 छात्रों को प्रशिक्षित किया है। संस्थान पिछले कई वर्षो से इस समस्या के व्यावहारिक समाधान की खोज में लगा हुआ है। भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने भी मानव संसाधन मंत्रालय से विदेशी भाषा के रुप में हिंदी का एक मानकीकृत कार्यक्रम तैयार करने का आग्रह किया है। मानव संस्थान विकास मंत्रालय ने संस्थान को इस दिशा में कार्य करने और एक कार्यक्रम तैयार करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में गम्भीरता पूर्वक विचार मंथन के बाद संस्थान इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि विदेशी विश्वविद्यालय में विद्यमान व्यापक भिन्नताओं के परिपेक्ष में विश्वव्यापी प्रयोग के लिए अध्ययन का एक मात्र कार्यक्रम बनाया जाना असंभव है। इस कार्य के लिए संस्थान ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की जिसने अपनी प्रारम्भिक बैठकों में यह सुझाव दिया कि क्रेडिट पध्दति पर आधारित एक मानकीकृत रुप रेखा बनायी जाए जिसे अधिकतर विश्वविद्यालय अपनी आवश्कता के अनुसार अपना सकें। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से उस रूपरेखा का निमार्ण करना है। तथा यह सुझाव देना है। कि विश्वविद्यालय इसे कैसे कार्यान्वित करे। इस परियोजना के अंतगर्त विभिन्न पाठ्यक्रमों का निर्माण किया गया है। जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है। स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम प्रस्तुत कार्यक्रम एक वर्ष का 32 क्रेडिट का है। कुल कार्यक्रम 3 वर्षो 96 क्रेडिट का हैं। यह कार्यक्रम सफलता पूर्वक पूरा करने के बाद छात्र को हिंदी में स्नातक स्तरीय उपाधि दी जा सकती है।इस कार्यक्रम के दो विशिष्ट घटक है। भाषिक कौशल के पाठ्यक्रम (16 क्रेडिट) और पाठों पर आधारित पाठ्यक्रमा (16 क्रेडिट) विश्वविद्यालयों को 32 क्रेडिट के इन पाठ्यक्रमों में से अपनी आवश्यकता और शैक्षिक योग्यता के अनुसार किसी भी पाठ्यक्रम का चयन करने का अधिकारी है। विश्वविद्यालय स्नातक स्तर पर सामान्यता: तीन प्रकार के भाषा पाठ्यक्रमों को संचालित करते हैं।-
स्नातकोत्तर स्तरीय पाठ्यक्रम प्रस्तुत कार्यक्रम का वर्ष का 32 क्रेडिट का है और कुल कार्यक्रम दो वर्षो के क्रेडिट का है। इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने पर छात्र को हिन्दी में स्नातकोत्तर स्तरीय उपाधि दी जा सकती है 32 क्रेडिट करने पर स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष का प्रमाण -पत्र दिया जा सकता है। 20 क्रेडिट कर लेने पर प्रथम से द्वितीय वर्ष में विद्यार्थी प्रवेश ले सकता है। इस कार्यक्रम में दो विशिष्ट घटक हैं।
विश्वविद्यालय को 64 क्रेडिट के इन पाठ्यक्रमों में से अपनी आवश्यकता और शैक्षिक योग्यता के अनुसार किसी भी पाठ्यक्रम का चयन करने का अधिकार है। शोध उपाधि इस पाठ्यक्रम के निम्नांकित उध्देश्य हैं-
शोध
उपाधि
की संरचना
अनुक्रमाणिका निर्धारण आदि
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