प्रकाशन
पीछे
संस्थान का एक प्रमुख कार्य हिंदी प्रशिक्षण से संबंधित शोधपरक सामग्री को
प्रकाशित करना है। हिंदी हिंदी शिक्षण विशेषत: द्वितीय अथवा विदेशी भाषा
के रुप में हिंदी शिक्षण के क्षेत्र में हिंदी की उच्चस्तरीय
पुस्तकों का नितांत अभाव है। इस अभाव को पूरा करने के लिए संस्थान द्वारा
हिंदी भाषा, भाषाविज्ञान, साहित्य,प्रणालीविज्ञान, कोशविज्ञान आदि से
संबद्ध विभिन्न विषयों पर उपयोगी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है। साथ
ही विभिन्न स्तरों और प्रयोजनों की पाठय-पुस्तकों, अध्यापक निर्देशिकाओं
तथा सहायक पुस्तकों का प्रकाशन भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त
'गवेषणा'नामक एक अर्ध-वार्षिक शोध पत्रिका प्रकाशित की जाती है, जिसमें
भाषाविज्ञान और भाषाशिक्षण से संबंधित अधिकारी विद्वानों के अनुसंधानपरक
मौलिक लेख, समीक्षाएँ और अद्यतन समाचार आदि समाविष्ट रहते हैं। 'समन्वय'
नामक वार्षिक पत्रिका भी संस्थान द्वारा प्रकाशित की जाती हैं ,
जिसमें संस्थान के छात्रों के लेख, कहानियाँ तथा कविताएँ प्रकाशित की जाती
हैं।
सत्रावधि
में प्रकाशित
पुस्तकें /पुस्तिकाएँ
- हिंदी - अँग्रेज़ी -लोथा शब्दावली तथा शब्दकोश
- हिंदी -लुशाई द्विभाषी शब्दकोश
- रहीम: आधुनिक संदर्भ
- रसखान: आधुनिक संदर्भ
- भाषा शिक्षण :सिद्धांत एवं प्रविधि
- आधुनिक निबंध संग्रह
- आधुनिक एकांकी संग्रह
- नियमावली (नियमित पाठ्यक्रम)
- नियमावली (हिंदी शिक्षण पारंगत) पत्राचार पाठ्यक्रम
सत्रावधि में प्रकाशित
पत्र/पत्रिकाएँ एवं अन्य
- छात्र पत्रिका 'समन्वय'
- वार्षिक विवरण
- संस्थान समाचार (मासिक पत्र)
प्रकाशनाधीन/ प्रेस में
मुद्रणाधीन पुस्तकें
- भारत सरकार की राजभाषा नीति
- हिंदी अंगामी अध्येता कोश
- हिंदी -खासी द्विभाषी कोश
- मीरा: आधुनिक संदर्भ
पत्रिकाएं
- मीडिया (अंक 3 तक) त्रैमासिक प्रति अंक 40.00 वार्षिक 150.00
- 'गवेषणा' (अंक 89/2008) त्रैमासिक प्रति अंक 40.00 वार्षिक 150.00
- 'गवेषणा' संचयन (2008), मूल्य 275.00

पंजीकृत डाक से पत्रिकाएं मँगाने पर 'गवेषणा' और 'मीडिया' के लिए वार्षिक ग्राहक शुल्क के साथ 100/- तथा 'समन्य पूर्वोत्तर' के लिए 50/- अतिरिक्त भेंजें.
बिक्री नियम :
पुस्तकालय / शिक्षण संस्थाओं एवं अन्य / सामान्य वर्ग के लिए कमीशन -
सामान्य पुस्तकों पर -
| रू. 500/- तक के मूल्य की खरीद पर |
15 प्रतिशत |
| रू. 500/- से अधिक और 2000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
20 प्रतिशत |
रू. 2000/- से अधिक और 5000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
30 प्रतिशत |
| रू. 5000/- से अधिक और 10,000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
40 प्रतिशत |
रू. 10,000/- से अधिक मूल्य की खरीद पर
|
50 प्रतिशत |
पाठ्य पुस्तकों पर -
| रू. 500/- से अधिक और 2000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
15 प्रतिशत |
| रू. 2000/- से अधिक और 5000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
20 प्रतिशत |
| रू. 5000/- से अधिक और 10,000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
30 प्रतिशत |
| रू. 10,000/- से अधिक मूल्य की खरीद पर |
35 प्रतिशत |
प्रकाशकों / पुस्तक विक्रेताओं के लिए कमीशन -
सामान्य पुस्तकों पर -
| रू. 500/- तक के मूल्य की खरीद पर |
20 प्रतिशत |
| रू. 500/- से अधिक और 2000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
25 प्रतिशत |
रू. 2000/- से अधिक और 5000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
35 प्रतिशत |
| रू. 5000/- से अधिक और 10,000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
45 प्रतिशत |
रू. 10,000/- से अधिक मूल्य की खरीद पर
|
50 प्रतिशत |
पाठ्य पुस्तकों पर -
| रू. 500/- तक के मूल्य की खरीद पर |
20 प्रतिशत |
| रू. 500/- से अधिक और 2000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
25 प्रतिशत |
| रू. 2000/- से अधिक और 5000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
35 प्रतिशत |
| रू. 5000/- से अधिक और 10,000/- तक के मूल्य की खरीद पर |
45 प्रतिशत |
रू. 10,000/- से अधिक मूल्य की खरीद पर
|
50 प्रतिशत |
पत्रिकाओं ( गवेषणा, मीडिया ) पर -
| 10 प्रतियों से 50 प्रतियों तक |
25 प्रतिशत |
| 50 से अधिक प्रतियों पर |
30 प्रतिशत |

बिकी हुई पुस्तकें वापस लेने का प्रवधान नहीं है.

रेल से पुस्तकें मँगाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन अवश्य लिखें.
| वी.पी.पी. द्वारा पुस्तकें नहीं भेजी जातीं. पुस्तकें मँगाने के लिए अग्रिम धनराशि डाक खर्च सहित 'सचिव, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा' के नाम ड्राफ्ट द्वारा भेंजें. |
संपर्क : प्रकाशन विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान, हिंदी संस्थान मार्ग, आगरा-282005 |
ऊपर की
ओर