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संकाय-संवर्धन कार्यक्रम |
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संकाय-संवर्धन कार्यक्रम ( 16.06.2008 - 27.06.2008 )
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा संस्थान के मुख्यालय एवं विभिन्न केंद्रों पर नव-नियुक्त प्राध्यापकों (अनुबंध) के लिए दिनांक 16.06.2008 से 27.06.2008 तक संकाय-संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया | कार्यक्रम का उद्घाटन 16 जून, 2008 को पूर्वाहन 10.00 बजे केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा के माननीय उपाध्यक्ष श्री रामशरण जोशी जी के द्वारा संपन्न हुआ | इस कार्यक्रम में मुख्यालय सहित अन्य केंद्रों के कुल 37 प्राध्यापक सम्मिलित हुए | 11 दिवसीय इस कार्यक्रम में रोज 10.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक व्याख्यान, चर्चा-परिचर्चा तथा ,संवाद का क्रम जारी रहा | संकाय-संवर्धन के इस कार्यक्रम में विभिन्न अध्ययन क्षेत्रों एवं अनुशासनों के प्रतिष्ठित विद्वान-विशेषज्ञों के सारगर्भित व्याख्यान हुए | व्याख्यान के पश्चात चर्चा-परिचर्च एवं संवाद का सिलसिला बेहद महत्वपूर्ण और सार्थक रहा | बाह्य विद्वानों में प्रो. एम. जी.चतुर्वेदी, प्रो. रामबख्श मिश्र एवं प्रो.चतु्र्भुज सहाय जी ने भाषाविज्ञान एवं व्याकरण के विभिन्न पक्षों पर अपने व्याख्यान दिए | प्रो. गोपेश्वर सिंह ने आधुनिकतावाद, यथार्थवाद: पुनर्जागरण एवं लोकसाहित्य पर अपना व्याख्यान दिया | प्रो. हरिमोहन शर्मा जी ने साहित्यिक विश्लेषण पद्धति के संबंध में विचार प्रकट किए | प्रो. इम्तियाज हसनेन साहब ने हिंदी का समाज वैज्ञानिक संदर्भ पर रोचक बातें प्रतिभागियों के समक्ष रखीं | प्रो. शकुंतला नागपाल जी ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 के अतिरिक्त आधुनिक विमर्श एवं जनतंत्र और शिक्षा पर व्याख्यान दिए | प्रो. रामजन्म शर्मा ने साहित्यिक मूल्यांकन पर प्रो. वीरेन्द्र मोहन जी ने आधुनिक साहित्य का परिप्रेक्ष्य और विमर्श कि अतिरिक्त हिंदी साहित्य के इतिहास पर चर्चा की | प्रो. के. के. गोस्वामी जी ने राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति पर प्रकाश डाला | प्रो. वी. रा. जगन्नाथन जी ने भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग तथा हिंदी व्याकरण की कुछ अल्प परिचित व्यवस्थाओं पर रोचक व्याख्यान दिया | प्रो. कृष्ण कुमार रत्तू जी ने शैक्षिक तकनीक पर बेहद उपयोगी चर्चा की | इन बाह्य विद्वानों के अतिरिक्त संस्थान के आंतरिक शैक्षिक सदस्यों में प्रो. शंभुनाथ जी ने साहित्य विश्लेषण पद्धति पर, प्रो. रामवीर सिंह जी ने आधुनिक हिंदी कविता में प्रगतिशील चेतना पर व्याख्यान दिया | प्रो. रामकमल पांडे ने अध्यापन की समस्याएं पर दो व्याख्यान दिए | प्रो. रामलाल वर्मा ने शैक्षिक प्रशासन एवं संगठन पर, प्रो. वशिनी शर्मा ने कंप्यूटर साधित भाषाशिक्षण पर, प्रो. महेन्द्र सिंह राणा ने हिंदी की मानक वर्तनी की समस्याएं, प्रो. भरत सिंह ने भाषा की अवधारणा विषय पर और डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी ने भाषा प्रौद्योगिकी की जानकारी प्रदान की | डॉ. गीता शर्मा ने सूक्ष्म शिक्षण, डॉ. योगेन्द्र कुमार ने साहित्य विश्लेषण पद्धति पर और डॉ. भरत सिंह पमार ने पाठ योजना एवं भाषाई परीक्षण एवं मूल्यांकन परीक्षण पर कक्षा ली | प्रो. वीरेन्द्र मोहन, अध्यक्ष हिंदी विभाग सागर विश्वविद्यालय इस समापन समारोह के मुख्य अतिथि रहे |